नई दिल्ली: भारत के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण है। भारत ने सिविल न्यूक्लियर जर्नी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम उठाया है और अपने परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण को आगे बढ़ाया है। पीएम मोदी ने अपने एक्स हैंडल पर इस बारे में पोस्ट किया और देश के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई दी।
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पीएम मोदी ने क्या कहा?
पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, "आज भारत ने सिविल न्यूक्लियर जर्नी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है और अपने परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण को आगे बढ़ाया है। कल्पक्कम (तमिलनाडु) में स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने क्रिटिकैलिटी प्राप्त कर ली है।"
पीएम मोदी ने बताया, "यह अत्याधुनिक रिएक्टर, जो खपत से अधिक ईंधन उत्पादन करने में सक्षम है, हमारी वैज्ञानिक क्षमता की गहराई और हमारी इंजीनियरिंग दक्षता की शक्ति को दर्शाता है। यह कार्यक्रम के तीसरे चरण में हमारे विशाल थोरियम भंडार का दोहन करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।"
पीएम मोदी ने ये भी कहा कि भारत के लिए यह गौरवपूर्ण क्षण है। हमारे वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को हार्दिक बधाई।
क्रिटिकैलिटी हासिल करने का मतलब ये है कि यह रिएक्टर के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह भारत के तीन चरणों वाले न्यूक्लियर प्रोग्राम के दूसरे चरण की शुरुआत का प्रतीक है। पीएम मोदी इसी उपलब्धि पर वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई दे रहे हैं और कह रहे हैं कि यह भारत की वैज्ञानिक क्षमता और इंजीनियरिंग ताकत का सबूत है। यह देश के लिए गर्व का पल है।
गृह मंत्री अमित शाह का भी सामने आया बयान
गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस मामले में एक्स पर पोस्ट कर लिखा, "हमारे सिविल परमाणु कार्यक्रम में एक नया युग शुरू हुआ है। कलपक्कम में प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर के निर्माण में मिली शानदार सफलता के लिए हमारे वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को हार्दिक बधाई। पावर उत्पादन में वैश्विक वर्चस्व की दिशा में यह एक बड़ा कदम है। यह संयंत्र हमारे विशाल थोरियम भंडार में छिपी शक्ति को उजागर करने और भारत को विश्व का ऊर्जा केंद्र बनाने के मोदी जी के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।"
3 स्टेज का है भारत का न्यूक्लियर प्रोग्राम
दरअसल देश में सीमित यूरेनियम भंडार और विशाल थोरियम भंडार का अधिकतम उपयोग करने के लिए परमाणु ऊर्जा विभाग ने 3 स्टेज का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम अपनाया है। यह कार्यक्रम परमाणु ऊर्जा उत्पादन और लंबे समय तक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बंद परमाणु ईंधन चक्र पर आधारित है।